रानी अवंतीबाई लोधी
पाठ्यक्रम: GS1/ इतिहास
संदर्भ
- भारत के रक्षा मंत्री ने लखनऊ में वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा का अनावरण किया और महान स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
रानी अवंतीबाई लोधी के बारे में
- रानी अवंतीबाई लोधी वर्तमान मध्य प्रदेश स्थित रामगढ़ रियासत की रानी तथा 1857 के विद्रोह की प्रमुख महिला नेताओं में से एक थीं।
- प्रारंभिक जीवन: उनका जन्म वर्ष 1831 में वर्तमान मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में हुआ था। उनका विवाह रामगढ़ के शासक विक्रमादित्य सिंह से हुआ।
- ब्रिटिश विलय का प्रतिरोध: अंग्रेजों ने अवंतीबाई के अधिकार की उपेक्षा करते हुए रामगढ़ रियासत को कोर्ट ऑफ वार्ड्स के अधीन रखकर उस पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया।
- 1857 के विद्रोह में भूमिका: उन्होंने स्थानीय शासकों, जमींदारों तथा किसानों को ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संगठित किया। उन्हें लगभग 4,000 सैनिकों की सेना गठित करने से भी जोड़ा जाता है।
- बलिदान: मार्च 1858 में जब ब्रिटिश सैनिकों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया, तब रानी अवंतीबाई लोधी ने आत्मसमर्पण करने के बजाय अपनी तलवार से स्वयं का जीवन समाप्त कर वीरगति प्राप्त की।
स्रोत: TOI
V-Dem का लोकतंत्र सूचकांक
पाठ्यक्रम: GS2/ शासन
संदर्भ
- V-Dem संस्थान की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार भारत का निर्वाचनात्मक लोकतंत्र सूचकांक का स्कोर वर्ष 1975 के बाद के सबसे निम्न स्तर पर पहुँच गया है। यह स्थिति लोकतांत्रिक संस्थाओं के कमजोर होने तथा संस्थागत स्वायत्तता को लेकर चिंताओं को रेखांकित करती है।
भारत के संबंध में प्रमुख निष्कर्ष
- आपातकाल के पश्चात सबसे निम्न स्कोर: भारत का नवीनतम निर्वाचनात्मक लोकतंत्र सूचकांक स्कोर वर्ष 1975 के बाद सबसे कम है। वर्ष 1975 में देश में आपातकाल लागू था।
- दीर्घकालिक गिरावट: रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2009 से भारत के लोकतांत्रिक प्रदर्शन में क्रमिक गिरावट देखी गई है।
- अधिनायकवादीकरण (Autocratisation): भारत को उन देशों में शामिल किया गया है जहाँ क्रमिक अधिनायकवादीकरण की प्रक्रिया देखी जा रही है। इसकी विशेषता लोकतांत्रिक संस्थाओं का व्यवस्थित रूप से कमजोर होना है।
- रिपोर्ट के अनुसार न्यायिक जवाबदेही एवं भ्रष्टाचार, निर्वाचन प्रबंधन निकाय (EMB) की स्वायत्तता तथा लोक अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष प्रशासन जैसे मानकों पर भारत के स्कोर विगत 50 वर्षों के सबसे निम्न स्तर पर हैं।
- रिपोर्ट के अनुसार संस्थाओं की स्वायत्तता में आई गिरावट के साथ शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में कमी तथा पत्रकारों के उत्पीड़न में वृद्धि भी देखने को मिली है।
- शैक्षणिक स्वतंत्रता: शैक्षणिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अनुसंधान एवं शिक्षण की स्वतंत्रता तथा संस्थागत स्वायत्तता जैसे संकेतकों के आधार पर मापी जाने वाली शैक्षणिक स्वतंत्रता में भी गिरावट दर्ज की गई है।
V-Dem संस्थान के बारे में
- V-Dem संस्थान स्वीडन के गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय में स्थित है।
- यह लोकतंत्र की अवधारणा और मापन के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाता है तथा लोकतंत्र को केवल चुनाव कराने की प्रक्रिया तक सीमित नहीं मानता।
स्रोत: TH
निर्यात केंद्र के रूप में जिले
पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था
चर्चा में
- सरकार ‘जिले निर्यात केंद्र’ (DEH) पहल के माध्यम से जिला-आधारित निर्यात रणनीति को सुदृढ़ कर रही है।
‘जिले निर्यात केंद्र’ (DEH) कार्यक्रम

- यह कार्यक्रम ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) कार्यक्रम पर आधारित है।
- इसका उद्देश्य प्रत्येक जिले की क्षमताओं एवं संसाधनों का उपयोग करते हुए उसके निर्यात की संभावनाओं को साकार करना है।
- इसमें प्रत्येक जिले को केवल उत्पादन की इकाई के रूप में नहीं, बल्कि निर्यात नियोजन की एक इकाई के रूप में देखा जाता है।
- यह स्थानीय उद्यमों को वैश्विक बाजारों तक पहुँच बनाने, प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने तथा जिला स्तर पर आर्थिक विकास को गति देने में भी सहायता कर रहा है। साथ ही, यह आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।

‘जिले निर्यात केंद्र’ (DEH) कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएँ
- DEH के अंतर्गत केंद्र, राज्यों और जिलों के बीच बहु-स्तरीय समन्वय तंत्र स्थापित किया गया है।
- सामान्य नीतिगत दिशा वाणिज्य विभाग द्वारा निर्धारित की जाती है, जबकि कार्यान्वयन की निगरानी विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा की जाती है। DGFT हितधारकों के बीच समन्वय एवं संवाद को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रगति का विश्लेषण भी करता है।
- यह कार्यक्रम विभिन्न जिलों में निर्यात योग्य उत्पादों एवं सेवाओं की पहचान करता है। इनमें भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त उत्पाद, कृषि क्लस्टर, खिलौना क्लस्टर, इंजीनियरिंग उत्पाद आदि शामिल हैं।
- यह गुणवत्ता मानकों, परीक्षण सुविधाओं, पैकेजिंग, ब्रांडिंग तथा प्रमाणन के संबंध में जागरूकता बढ़ाने एवं क्षमता निर्माण में सहायता करता है, जिससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश करने में सुविधा होती है।
Source: PIB
भारत की संप्रभु क्रेडिट रेटिंग बढ़ाकर ‘A-’ की गई
पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (JCR) ने भारत की संप्रभु क्रेडिट रेटिंग को एक पायदान बढ़ाकर BBB+ से A- कर दिया है। एजेंसी ने इसके लिए लगभग 7% की निरंतर आर्थिक वृद्धि, वस्तु एवं सेवा कर (GST) तथा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे नीतिगत उपायों और बैंकों की सुदृढ़ होती बैलेंस शीट को प्रमुख आधार बताया है।
परिचय
- JCR की स्थापना वर्ष 1985 में हुई थी। यह एक जापानी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है, जो सरकारों, वित्तीय संस्थानों और कंपनियों की ऋण साख का आकलन करती है।
- संप्रभु देशों के मामले में इसकी रेटिंग मुख्यतः सरकार की अपनी ऋण देनदारियों को पूरा करने की क्षमता और इच्छा को दर्शाती है।

- महत्व: रेटिंग में यह सुधार भारत की आर्थिक बुनियाद, राजकोषीय प्रबंधन और वित्तीय स्थिरता के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है तथा निवेशकों के विश्वास को सुदृढ़ करने में सहायक हो सकता है।
प्रमुख वैश्विक रेटिंग एजेंसियों द्वारा भारत की संप्रभु क्रेडिट रेटिंग

स्रोत: BS
निमोनिया एवं मैनिंजाइटिस के विरुद्ध सार्वभौमिक टीका
पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य
संदर्भ
- वैज्ञानिक एक ऐसे सार्वभौमिक न्यूमोकोकल टीके के विकास की दिशा में कार्य कर रहे हैं, जो स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया जीवाणु के लगभग सभी सौ प्रकारों को लक्षित कर सके।
परिचय
- उद्देश्य: वर्तमान टीकों से उत्पन्न कुछ अवांछनीय परिणामों को रोकना तथा निमोनिया, मैनिंजाइटिस और अन्य न्यूमोकोकल रोगों के खतरे को जनसंख्या में बने रहने से रोकना।
- स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया नामक जीवाणु के कम-से-कम सौ अलग-अलग प्रकार या सीरोटाइप होते हैं। यह सामान्यतः हमारी नाक और गले की ऊतक-परत में पाया जाता है। S. न्यूमोनिया सामान्य परिस्थितियों में हानिरहित होता है।
- लेकिन जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है, तो ये जीवाणु फेफड़ों में प्रवेश कर निमोनिया उत्पन्न कर सकते हैं तथा मैनिंजाइटिस और सेप्सिस का कारण भी बन सकते हैं।
- इन रोगों को न्यूमोकोकल रोग कहा जाता है और इन्हें टीकों के माध्यम से रोका जा सकता है।
- वर्तमान टीके: वर्तमान न्यूमोकोकल टीके लगभग 100 सीरोटाइपों में से केवल कुछ चुनिंदा सीरोटाइपों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
- टीके का कवरेज बढ़ाने के लिए वैज्ञानिकों को इसमें अतिरिक्त सीरोटाइप-विशिष्ट कैप्सुलर पॉलीसैकेराइड शामिल करने की आवश्यकता होती है।
- इसके अतिरिक्त, एक ही टीके की एक खुराक में सभी सीरोटाइपों को शामिल करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण और महँगा भी होगा।
- इसलिए वैज्ञानिक एक ऐसे सार्वभौमिक न्यूमोकोकल टीके की खोज कर रहे हैं, जो सभी सीरोटाइपों को लक्षित कर सके तथा जनसंख्या में निमोनिया, मैनिंजाइटिस और अन्य न्यूमोकोकल रोगों के खतरे को रोक सके।
स्रोत: TH
शीत एलोडाइनिया (Cold Allodynia)
पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य
संदर्भ
- बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और कोलकाता स्थित TCG-CREST के शोधकर्ताओं ने कीमोथेरेपी के एक दुष्प्रभाव, जिसे ‘शीत एलोडाइनिया’ (कहा जाता है, से जुड़ी संवेदनाओं में शामिल ‘मस्तिष्क सर्किट’ की पहचान की है।
शीत एलोडाइनिया
- शीत एलोडाइनिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें प्रभावित व्यक्ति सामान्य स्तर के ठंडे तापमान से भी दर्द या असहजता महसूस कर सकता है।
- यह ‘कीमोथेरेपी-प्रेरित परिधीय न्यूरोपैथी’ के प्रमुख दुष्प्रभावों में से एक है।
- इसमें कीमोथेरेपी के कारण उत्पन्न कई तंत्रिका-संबंधी दुष्प्रभाव शामिल होते हैं, जैसे तापमान के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता, सुई चुभने जैसी अनुभूति अथवा दर्द आदि।
- विशेष रूप से शीत एलोडाइनिया को ऑक्सालिप्लाटिन का एक दुष्प्रभाव माना जाता है। ऑक्सालिप्लाटिन प्लैटिनम युक्त एक सामान्यतः प्रयुक्त कीमोथेरेपी दवा है।
कीमोथेरेपी
- कीमोथेरेपी एक औषधीय उपचार है, जिसमें शरीर में तीव्रता से बढ़ने वाली कोशिकाओं/कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए शक्तिशाली रसायनों का उपयोग किया जाता है।
- कीमोथेरेपी दवाओं का उपयोग अकेले अथवा अन्य उपचारों के साथ संयोजन में विभिन्न प्रकार के कैंसर के उपचार के लिए किया जा सकता है।
- यद्यपि कीमोथेरेपी अनेक प्रकार के कैंसर के उपचार का एक प्रभावी माध्यम है, लेकिन इसके साथ विभिन्न दुष्प्रभाव उत्पन्न होने का जोखिम भी रहता है।
स्रोत: IE
तेनजिंग नॉर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार
पाठ्यक्रम: विविध
चर्चा में
- सरकार ने वर्ष 2024 के लिए तेनजिंग नॉर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की है।
तेनजिंग नॉर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार
- ये पुरस्कार साहसिक गतिविधियों के क्षेत्र में व्यक्तियों की उत्कृष्ट उपलब्धियों को मान्यता देते हैं तथा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सहनशक्ति, जोखिम उठाने, टीम भावना और त्वरित एवं प्रभावी निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदान किए जाते हैं।
- ये पुरस्कार चार श्रेणियों में दिए जाते हैं:
- स्थल साहसिक गतिविधियाँ
- जल साहसिक गतिविधियाँ
- वायु साहसिक गतिविधियाँ
- जीवनपर्यंत उपलब्धि
- प्रत्येक पुरस्कार प्राप्तकर्ता को एक प्रतिमा, प्रमाण-पत्र और 15 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।
- राष्ट्रीय चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं का चयन किया गया।
- समिति ने प्राप्त नामांकनों का मूल्यांकन किया और राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने के लिए पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की सिफारिश की।
Source : Air
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